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Rishi-Krishi: Chemical Free Farming

Rishi-Krishi is a course to teach and re-promote those traditional methods and remedies of Chemical Free Farming.

COHORT COURSE
Duration
30 Hours (Total 10 Weeks)
Date & Time

16 Jan 2021

6.30 PM-8 PM (IST)

Two days a week (Sat, Sun)

Price

3,600.00 (+ 3.5% online fee)

Medium of Instruction
Hindi and English
Eligibility
Anyone who has can speak and understand basic Hindi & English.
Delivery
Online - Live web conference (Zoom) sessions; also recorded for post-session viewing
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An Online Course

by

Introduction

According to many evidences, till 1857, India was the most prosperous country in the world. The biggest contribution to this growth of India was from cottage industries and second place was from agriculture. Agriculture, since ancient times, has been the backbone of India’s culture and economy. It has not only nourished the people of India with nutritious food, but has also provided them with Ayurvedic medicines and traditional methods of health care. Our ancestors practiced agriculture, producing food that was nutritious, chemical free and which was available at an optimal cost.

अनेक प्रमाणों के अनुसार 1857 तक भारत संसार का सबसे स्मृद्ध देश था। भारत की इस स्मृद्धि में सबसे बड़ा योगदान कुटीर उद्योगों का था और दूसरा स्थान कृषि का था। कृषि, प्राचीन काल से, भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। इसने न केवल पौष्टिक भोजन के साथ भारत के लोगों का पोषण किया है, बल्कि उन्हें आयुर्वेदिक दवाओं और स्वास्थ्य देखभाल के पारंपरिक तरीकों के साथ भी प्रदान किया है। हमारे पूर्वजों ने कृषि का अभ्यास किया था, हमारे वर्तमान किसानों की तुलना में बहुत अच्छी लागत पर बहुत अधिक स्वादिष्ट और जहर मुक्त उपज का उत्पादन किया |

About this Course

Rishi-Krishi is a course to teach and re-promote those traditional methods and remedies for chemical-free farming. Therefore, there is a possibility of employment for millions of youth in the agriculture sector who are providing food to 137+ crore people. The only pre-requisite for such a possibility is that the cost of farming be very low and the yield be higher. This is possible through the amazing “Rishi-Krishi“. With this farming system, we will surely be successful in creating a self-reliant, strong and prosperous India.

ऋषि-कृषि रासायनिक मुक्त खेती के उन पारंपरिक तरीकों और उपायों को सिखाने और फिर से बढ़ावा देने के लिए एक कोर्स है| अतः 137 करोड़ लोगों को भोजन उपलब्ध करवाने वाले कृषि क्षेत्र में लाखों युवाओं के लिये रोजगार की सम्भावनाएं हैं बस शर्त इतनी है कि खेती का खर्च बहुत कम हो और उपज बढ़ जाए। यह कमाल “ऋषि-कृषि” द्वारा सम्भव है। इस कृषि-पद्धति से हम निश्चित रूप से स्वावलम्बी, सशक्त, स्मृद्ध भारत बनाने में सफ़ल होंगे।

Course Objectives

  • To increase farmers income
  • To promote organic farming
  • Make Agriculture profitable
  • Environmental protection from chemical farming
  • To prevent the diseases spreading from chemical farming.
  • कसानो क आय बढ़ाना
  •  िवषमु खेती को बढ़ावा
  • कृिष को लाभकारी बनाना
  • खेती के रसायनो से पयवरण सुरा
  • रासायिनक खेती से बढ़ते असाय रोग पर रोक लगाना।

Expected Outcomes

  • After this training, you will be qualified to get two times or even more yield than chemical farming, at a cost of 10-20 times less.That is, if it costs 15-20 thousand ₹ to grow 22 quintals of paddy in an acre, then with this technique it will be possible to grow 35-40 quintals of paddy in an acre for 1000 ₹.
  • That is, about 30-40 thousand ₹ per acre income will increase.
  • After this training, you will be able to teach more productive farming techniques from the Department of Agriculture and Horticulture.
  • You can easily identify GM and non GM fruits, vegetables, trees and plants.
  • इस प्रशिक्षण के बाद 10-20 गुणा कम खर्च में, रासायनिक खेती से दो गुणा या उससे भी अधिक उपज प्राप्त करने की योग्यता प्राप्त होगी।
  • अर्थात यदि एक एकड़ में 22 क्विंटल धान उगाने पर 15-20 हजार ₹ खर्च होता है तो इस तकनीक से 1000₹ खर्च में 35-40 क्विंटल धान एक एकड़ में उगाना सम्भव होगा। अर्थात लगभग 30-40 हजार ₹ प्रति एकड़ आय बढ़ सकेगी।
  •  इस प्रशिक्षण के बाद आप कृषि व उद्यान विभाग वालों से अधिक अच्छी तरह खेती की परिणमकारी तकनीकें सिखा सकेंगे
  • आप आसानी से जीऐम तथा नान जीऐम फल, सब्जियाँ, पेड़-पौधों की पहचान करके उन्हें लगाने और खाने से बच सकेंगे। अर्थात जीऐम फसलों से सम्भावित कैंसर से आप अपनी और अपनो की रक्षा कर सकेंगे।
  • जीऐम फसलों को लैब में बनाने पर करोड़ों डालर का खर्च होता है। इन्हें रिवर्स करने पर भी करोड़ों डालर का खर्च होगा। इस प्रशिक्षण के बाद बिना खर्च के आप जीऐम फसलों का डीऐनए बदल सकेंगे जो कि संसार के वैज्ञानिकों के लिये असम्भव है। पर आप अपने पूर्वजों के गुप्त व लुप्त ज्ञान को प्राप्त करके यह कमाल कर सकेंगे।
  • ऐसी कोई तकनीक शिक्षा संस्थानो में नहीं सिखाई जाती जिससे आप जानसकें कि आपके शरीर पर कौनसा आहार, दवा, वस्त्र, पात्र, सौंदर्यप्रसाधन, साबुन, तेल आदि अच्छा या बुरा प्रभाव डालेंगे। इस प्रशिक्षण के बाद आप आसानी से इसकी जाँच कर सकेंगे।
  • असली तथा नकली शहद, घी, दूध आदि की पहचान बहुत सरलता से आप कर सकेंगे।
  • शरीर और प्रकृति के कुछ रहस्य आप समझ सकेंगे जो जीवन में सफलताएं पाने में सहायक सिद्ध होंगे।
  • फसलों के साथ शरीर और मन के अनेक रोगों के समाधान करना भी आपके लिये सम्भव होगा।

Beneficiaries

  • Anyone who wants to earn a good income in organic agriculture and dairy farming
  • Youth seeking a career in organic agriculture & dairy farming.
  • Teaching professionals interested in agriculture and organic farming.
  • Self employed youth.
  • Students of Agriculture sector.
  • जो कोई भी जैविक कृषि और डेयरी खेती में अच्छी आय अर्जित करना चाहता है
  • जैविक कृषि में करियर बनाने वाले युवा
  • कृषि और जैविक खेती में रुचि रखने वाले पेशेवर।
  • स्वरोजगार करने वाले युवा।
  • कृषि क्षेत्र के छात्र।

Syllabus

Total 20 lectures of 1.5 hours each – 30 Hours of online learning

I Block of Classes

  • Comparison of modern and interactive agriculture
  • The background, sentiment and results of modern agriculture.
  • Declaration of Retirement.
  • Comparison and properties of defects based on the DNA structure of bass tars and bass indicus bovine.
  • Cultivation of Desi and Foreign Cows.
  • Perception of Desi and foreign Kachu and prices on cultivation.
  • The effects of Polyhouse on the environment. Is polyhouse good or bad?
  • Poly Reservoir and the effects and results of Machag. The effects of Ph being low or high.
  • Effects and result of chemical preservatives on seeds.
  • Effects of Enzymes on crop and Manufacturing methods.
  • आधुिनक तथा पारपरक कृिष क तुलना
  • आधुिनक कृिष क पृभूिम, भाव और परणाम।
  • वनपित-वृि का िवान।
  • बास टारस तथा बास इंिडकस गोवंश क डीऐनए संरचना के आधार पर तुलना तथा गुण, दोष का अययन।
  • देसी तथा िवदेशी गोवंश का खेती पर भाव।
  • देसी तथा िवदेशी कचु का अतर और खेती पर भाव।
  • पालीहाउस का फसल, पयावरण तथा िणय पर भाव; लाभ या हािन?
  • पाली जलभडार तथा मचग के भाव तथा परणाम। पीऐच कम या अिधक होने का वनपित जगत पर भाव।
  • रासायिनक संरक का बीज पर भाव तथा परणाम।
  • ऐजाईम का फसल पर भाव और िनमाण िविध।
  • II Block of Classes
  • Diet and measures of food to the plant from the soil.
  •  % of dietary intake from age and vedic techniques of inter-energy.
  •  Dredging, sequential cultivation of seeds & its consequences.
  • Annual-planted plants, crops & the idea of ​​DNA transformation from indigenous techniques and mythological techniques.
  • Utilization and use of medical almanac in agricultural programs.
  • Prohibition of fulfillment and their authenticity. Mythological Yoga in Farming.
  • Conventional fungi-control and their use, expressions. (Most of Kasano Causes of fungal / fungal diseases Control is on His black, simple foreign solution.)
  • The use of prayer in the Panchatatva and expressions in farming. Earth’s energy changes.
  • Construction of foreign fertilizer, pesticides and yoga.
  • Seed production from foreign measures. Harvesting of crops and seeds.
  • .िमी से पौध को आहार ि का िवान और उपाय। जैिवक आछादन/मचग।
  • वायुमल से आहार ि का % तथा अंतर-ऊजा ाि क वैदक तकनीक।
  • पौध,बीज का अनुवांिशक िवकृितकरणतथा उसके परणाम / भाव।
  • अनुवांिशक-वाकृत पौध, फसल क पहचा क वदेशी तकनीक तथा पौरािणक तकनीक से डीऐनए परवतन का िवान।
  • कृिष काय म वैदक पंचांग क उपयोिगता तथा योग।
  • पुरण के िविधिनषेध तथा उनक मािणकता। खेती म पौरािणक योग।
  • पारपरक कवक-िनयंक िनमाण व उनका उपयोग, भाव। (कसानो का सबसे अपय कवक / फंगस रोग के िनयंण पर होरहा है। उसका सते, सरल वदेशी समाधान।)
  • .ाथना का पंचतव पर भाव तथा खेती म उपयोग। धरती का ऊजा परवतन।
  • वदेशी ऊवरक, कटनाशक का िनमाण और योग।

Teacher
teacher

Vaidya Rajesh Kapoor

Traditional Healer and Agriculturist

Vaidya Rajesh Kapoor is a Traditional Healer and Agriculturist by profession and has a formal clinic started in 1997. He had started his study on traditional techniques of treatment in 1972. Adding to his leadership he has been a National Petron at Jaivik Jeevan Shaili Vigyan, an Ex-Member: Medicinal Plant Board, H.P from 2006 to 2010, a Founder President at Sanskrit Chatra Sangh, Himachal Pradesh ( 1974 to 1976) an Ex-President of Bharat Vilas Parishad, Solan (2008 to 2009) Ex- President of Panchnad Research Institute, Solan ( 2008 to 2010). He is an Art of Living: Agri Teacher from 2012. Petron : Kamdhenu Panchgavya Shodh Santander, Agra from 2015 He is known for Organizing training camps, workshops, lectures all over India on the following topics: Lifestyle disease, causes & cure/preventions, Health Management courses, Yoga, Pranayam, meditation for physical and mental health. Skill development courses for youths, specially for women empowerment. Stress management, capacity building and personality development courses. Human values, importance of social and individual health.Spiritual life for happiness and health.Environmental health education. Air, water, and soil purification methods. Herb-identification and applications.etc. He has a book published "आधुनिक जीवनशैली के रोग और समाधान" under his name, released by Hon' Governor Gujrat Acharya Devavrat ji. Along with 48 articals published on e-magazine Pravakta.com. He has also been an Editor : Gavaksh Bharti, monthly magazine, since 1992, and Chief editor Souvenir published on state level SHOOLINI Fair (21-23 June, 2001)

3,600.00 (+ 3.5% online fee)